AKBAR BIRBAL STORIES-अकबर-बीरबल की कहानियाँ

बीरबल बहुत बुद्धिमान थे।  उनकी  दूर -दूर के राज्यों  चर्चा थी। उनकी बुद्धिमत्ता  के कारण ही सभी ज्योतिष  और राजदरबारी घृणा करते थे उनसे। बीरबल राजा अकबर के बहुत प्रिय थे। अकबर बहुत मानते थे  बीरबल को। राजा अकबर जो भी सवाल पूछते बीरबल हाजिर जवाब देता। निचे कुछ कहानियाँ और कुछ चुटकुले है आशा है। आप भाईयो को अवस्य ही पसन्द आयेंगे।  

तंत्र -मन्त्र:-

एक  बार कुछ दरबारियो ने महाराजा अकबर  से कहा -“महाराज आजकल बीरबल को ज्योतिष का शोक चढ़ा है ,कहता फिरता है ,मंत्रो से मैं कुछ भी  कर सकता हुँ ।  ”तभी दूसरे दरबारी ने कान भरे -“हाँ महाराज वह बहुत शेखी बखानता फिरता है ,हम तो परेशान हो गए उससे दरबार के काम में जरा भी रूचि नहीं लेता।  ”राजा बोले-” अच्छा परखकर देखते है बीरबल के मंत्रो में क्या दम-ख़म है ”यह कहते हुए राजा ने एक दरबारी से कहा -“तुम अंगूठी छिपा लो , आज इसी के बारे में पूछेंगे। ”तभी बीरबल दरबार में आया राजा को प्रणाम कर अपनी जगह पर जा बैठा।अकबर बोले -“बीरबल अभी-अभी मेरी अंगूठी कही गायब हो गयी। जरा पता लगाओ सुना है ,तुम तंत्र-मंत्र से  कुछ कर सकते हो। ”बीरबल ने कनखियों से दरबारियों की ओर देखा। वह समझ गया था की उसके विरुद्ध राजा के कान  डटकर भरे गए है ।कुछ सोचकर उसने कागज पर आड़ी-तिरछी  खींची। फिर बोला -“महाराज इस पर हाथ रखे, अंगूठी जहा भी रखी होगी ,अपने आप ऊँगली में आ जाएगी।”राजा ने उस तंत्र पर हाथ रख दिया। तभी बीरबल चावल हाथ में लेकर दरबारियों की और फेकने लगा।जिसके पास अंगूठी थी, वह सोचने लगा –  कही सचमुच अंगूठी निकालकर राजा के  पास न पहुँच जाये उसने कसकर जेब पर हाथ रख लिया।बीरबल यह देख रहा था -“महाराज ,अंगूठी तो मिल गयी।  उस दरबारों ने कसकर पकड़ रखी  है। ”
अकबर बीरबल का संकेत समझ हंस पड़े।  उन्होंने अंगूठी इनाम में दे दी।  चुगली करने वाले के मुँह शर्म से झुक गये।

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जी मेहरबान:-

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल के सामने अपने विचार प्रकट किये -“क्यों बीरबल ,जिन लोगो के नाम के आखिर में वान या बान लगा हो।
वो ज्यादातर कम अक्ल ओर छोटा काम करने वाले होते है ना“जैसे कि कोअचवन ,दरबान ,पहलवान ठीक कहा न मैंने “
“जी मेहरबान -। ” बीरबल ने बड़े अदब से कहा।
बादशाह चौके और हँसने लगे -“समझ गए कि बीरबल ने स्वयं उनके शब्दजाल में उन्हें फंसा दिया है। ”

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हमारे राज्य में कौए कितने हैं ?:-


एक दिन अकबर अपने मत्रीं बीरबल के साथ अपने महल के बाग में घूम रहे थे. बीरबल बागों में उडते कौओं को देखकर कुछ सोचने लगे और 
 

बीरबल से पूछा, “क्यों बीरबल, हमारे राज्य में कितने कौए होंगे?”बीरबल ने कुछ देर अंगुलियों पर कुछ हिसाब लगाया और बोले, “हुज़ूर, हमारे राज्य में कुल मिलाकर १,११, ९८७ कौए हैं”.

“तुम इतना विश्वास से कैसे कह सकते हो?”, अकबर बोले.


“हुज़ूर, आप खुद गिन लिजीये”, बीरबल बोले.



अकबर को कुछ इसी प्रकार के जवाब का अंदेशा था. उन्होंने ने पूछा, “बीरबल, यदि इससे कम हुए तो?”


“तो इसका मतलब है कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों में गये हैं. और यदि ज्यादा हुए तो? तो इसका मतलब यह हैं हु़जूर 
 
कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने हमारे राज्य में आये हैं”, बीरबल ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.

अकबर एक बार फिर मुस्कुरा कर रह गये.

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 अकबर बीरबल मूर्खो की फेहरिस्त:-

 
बादशाह अकबर घुड़सवारी के इतने शौकीन थे कि पसंद आने पर घोड़े का मुंहमांगा दाम देने को तैयार रहते थे। दूर-दराज के मुल्कों, जैसे अरब,

 पर्शिया आदि से घोड़ों के विक्रेता मजबूत व आकर्षक घोड़े लेकर दरबार में आया करते थे। बादशाह अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए चुने गए


 घोड़े की अच्छी कीमत दिया करते थे। जो घोड़े बादशाह की रुचि के नहीं होते थे उन्हें सेना के लिए खरीद लिया जाता था।
अकबर के दरबार में घोड़े के विक्रेताओं का अच्छा व्यापार होता था।एक दिन घोड़ों का एक नया विक्रेता दरबार में आया। अन्य व्यापारी भी उसे नहीं जानते थे। उसने दो बेहद आकर्षक घोड़े बादशाह को बेचे और

बादशाह को चूंकि घोड़े बहुत पसंद आए थे, सो वैसे ही सौ और घोड़े लेने का तुरंत मन बना लिया। 


सभी चाहते थे कि बीरबल यह मामला उठाए।


बीरबल भी इस सौदे से खुश न था। वह बोला, ‘‘हुजूर ! कल मुझे आपने शहर भर के मूर्खों की सूची बनाने को कहा था। मुझे खेद है कि उस सूची


बादशाह अकबर का चेहरा मारे गुस्से के सुर्ख हो गया। उन्हें लगा कि बीरबल ने भरे दरबार में विदेशी मेहमानों के सामने उनका अपमान किया


गुस्से से भरे बादशाह चिल्लाए, ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमें मूर्ख बताने की ?’


दरबार में ऐसा सन्नाटा छा गया कि सुई गिरे तो आवाज सुनाई दे जाए।


अब बादशाह अकबर अपना सीधा हाथ उठाए, तर्जनी को बीरबल की ओर ताने आगे बढ़े। दरबार में मौजूद सभी लोगों की सांस जैसे थम सी गई


लेकिन बादशाह ने अपना हाथ बीरबल के कंधे पर रख दिया। वह कारण जानना चाहते थे। बीरबल समझ गया कि बादशाह क्या चाहते हैं। वह

 कहा कि वह ठीक ऐसे ही सौ घोड़े और लाकर दे सकता है, बशर्ते उसे आधी कीमत पेशगी दे दी जाए।


बादशाह ने अपने खजांची को बुलाकर व्यापारी को आधी रकम अदा करने को कहा। खजांची उस व्यापारी को लेकर खजाने की ओर चल दिया।

लेकिन किसी को भी यह उचित नहीं लगा कि बादशाह ने एक अनजान व्यापारी को इतनी बड़ी रकम बतौर पेशगी दे दी। लेकिन विरोध जताने

 की हिम्मत किसी के पास न थी।


 में आपका नाम सबसे ऊपर है।’’


 है।

‘‘क्षमा करें बादशाह सलामत।’’ बीरबल अपना सिर झुकाते हुए सम्मानित लहजे में बोला आप चाहें तो मेरा सर कलम करवा दें, यदि आप के

 कहने पर तैयार की गई मूर्खों की फेहरिस्त में आपका नाम सबसे ऊपर रखना आपको गलत लगे।’’


 थी। उत्सुक्ता व उत्तेजना सभी के चेहरों पर नृत्य कर रही थी। उन्हें लगा कि बादशाह सलामत बीरबल का सिर धड़ से अलग कर देंगे। इससे


 पहले किसी की इतनी हिम्मत न हुई थी कि बादशाह को मूर्ख कहे।


 बोला, ‘‘आपने घोड़ों के ऐसे व्यापारी को बिना सोचे-समझे एक मोटी रकम पेशगी दे दी, जिसका अता-पता भी कोई नहीं जानता। वह आपको


 धोखा भी दे सकता है। इसलिए मूर्खों की सूची में आपका नाम सबसे ऊपर है। हो सकता है कि अब वह व्यापारी वापस ही न लौटे। वह किसी


 अन्य देश में जाकर बस जाएगा और आपको ढूढ़े नहीं मिलेगा। किसी से कोई भी सौदा करने के पूर्व उसके बारे में जानकारी तो होनी ही चाहिए।


 उस व्यापारी ने आपको मात्र दो घोड़े बेचे और आप इतने मोहित हो गए कि मोटी रकम बिना उसको जाने-पहचाने ही दे दी। यही कारण है


 बस।’’ 


‘‘तुरंत खजाने में जाओ और रकम की अदायगी रुकवा दो।’’ अकबर ने तुरंत अपने एक सेवक को दौड़ाया। 


 बीरबल बोला, ‘‘अब आपका नाम उस सूची में नहीं रहेगा।’’ 


 बादशाह अकबर कुछ क्षण तो बीरबल को घूरते रहे, फिर अपनी दृष्टि दरबारियों पर केन्द्रित कर ठहाका लगाकर हंस पड़े। सभी लोगों ने राहत


 की सांस ली कि बादशाह को अपनी गलती का अहसास हो गया था। हंसी में दरबारियों ने भी साथ दिया और बीरबल की चतुराई की एक स्वर से  


प्रशंसा की

                                                      *************   

                                        

बीरबल की पैनी दृष्टि:-

बीरबल बहुत नेक दिल इंसान थे। वह सैदव दान करते रहते थे और इतना ही नहीं, बादशाह से मिलने वाले इनाम को भी ज्यादातर गरीबों और
 दीन-दुःखियों में बांट देते थे, परन्तु इसके बावजूद भी उनके पास धन की कोई कमी न थी। दान देने के साथ-साथ बीरबल इस बात से भी
 चौकन्ने रहते थे कि कपटी व्यक्ति उन्हें अपनी दीनता दिखाकर ठग न लें।
ऐसे ही अकबर बादशाह ने दरबारियों के साथ मिलकर एक योजना बनाई कि देखें कि सच्चे दीन दुःखियों की पहचान बीरबल को हो पाती है या
 नही। बादशाह ने अपने एक सैनिक को वेश बदलवाकर दीन-हीन अवस्था में बीरबल के पास भेजा कि अगर वह आर्थिक सहायता के रूप में 
बीरबल से कुछ ले आएगा, तो अकबर की ओर से उसे इनाम मिलेगा।
एक दिन जब बीरबल पूजा-पाठ करके मंदिर से आ रहे थे तो भेष बदले हुए सैनिक ने बीरबल के सामने आकर कहा, “हुजूर दीवान! मैं और मेरे
 आठ छोटे बच्चे हैं, जो आठ दिनों से भूखे हैं….भगवान का कहना है कि भूखों को खाना खिलाना बहुत पुण्य का कार्य है, मुझे आशा है कि आप
 मुझे कुछ दान देकर अवश्य ही पुण्य कमाएंगे।”
बीरबल ने उस आदमी को सिर से पांव तक देखा और एक क्षण में ही पहचान लिया कि वह ऐसा नहीं है, जैसा वह दिखावा कर रहा है।
बीरबल मन ही मन मुस्कराए और बिना कुछ बोले ही उस रास्ते पर चल पडे़ जहां से होकर एक नदी पार करनी पड़ती थी। वह व्यक्ति भी
 बीरबल के पीछे-पीछे चलता रहा। बीरबल ने नदी पार करने के लिए जूती उतारकर हाथ में ले ली। उस व्यक्ति ने भी अपने पैर की फटी पुरानी
 जूती हाथ में लेने का प्रयास किया।

बीरबल नदी पार कर कंकरीले मार्ग आते ही दो-चार कदम चलने के बाद ही जूती पहन लेता। बीरबल यह बात भी गौर कर चुके थे कि नदी पार
 करते समय उसका पैर धुलने के कारण वह व्यक्ति और भी साफ-सुथरा, चिकना, मुलायम गोरी चमड़ी का दिखने लगा था इसलिए वह
 मुलायम पैरों से कंकरीले मार्ग पर नहीं चल सकता था।
“दीवानजी! दीन ट्टहीन की पुकार आपने सुनी नहीं?” पीछे आ रहे व्यक्ति ने कहा।
बीरबल बोले, “जो मुझे पापी बनाए मैं उसकी पुकार कैसे सुन सकता हूँ? ”
“क्या कहा? क्या आप मेरी सहायता करके पापी बन जांएगे?”
“हां, वह इसलिए कि शास्त्रों में लिखा है कि बच्चे का जन्म होने से पहले ही भगवान उसके भोजन का प्रबन्ध करते हुए उसकी मां के स्तनों में
 दूध दे देता है, उसके लिए भोजन की व्यव्स्था भी कर देता है। यह भी कहा जाता है कि भगवान इन्सान को भूखा उठाता है पर भूखा सुलाता
नहीं है। इन सब बातों के बाद भी तुम अपने आप को आठ दिन से भूखा कह रहे हो। इन सब स्थितियों को देखते हुए यहीं समझना चाहिये कि
 भगवान तुमसे रूष्ट हैं और वह तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भूखा रखना चाहते हैं लेकिन मैं उसका सेवक हूँ, अगर मैं तुम्हारा पेट भर दूं तो
 ईश्वर मुझ पर रूष्ट होगा ही। मैं ईश्वर के विरूध्द नहीं जा सकता, न बाबा ना! मैं तुम्हें भोजन नहीं करा सकता, क्योंकि यह सब कोई पापी ही
 कर सकता है।”
बीरबल का यह जबाब सुनकर वह चला गया।
उसने इस बात की बादशाह और दरबारियों को सूचना दी।
बादशाह अब यह समझ गए कि बीरबल ने उसकी चालाकी पकड़ ली है।
अगले दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा, “बीरबल तुम्हारे धर्म-कर्म की बड़ी चर्चा है पर तुमने कल एक भूखे को निराश ही लौटा दिया, क्यों?”
“आलमपनाह! मैंने किसी भूखे को नहीं, बल्कि एक ढोंगी को लौटा दिया था और मैं यह बात भी जान गया हूँ कि वह ढोंगी आपके कहने पर मुझे
 बेवकूफ बनाने आया था।”
अकबर ने कहा, “बीरबल! तुमनें कैसे जाना कि यह वाकई भूखा न होकर, ढोंगी है?”
“उसके पैरों और पैरों की चप्पल देखकर। यह सच है कि उसने अच्छा भेष बनाया था, मगर उसके पैरों की चप्पल कीमती थी।”
बीरबल ने आगे कहा, “माना कि चप्पल उसे भीख में मिल सकती थी, पर उसके कोमल, मुलायम पैर तो भीख में नहीं मिले थे, इसलिए कंकड
 क़ी गड़न सहन न कर सके।”
इतना कहकर बीरबल ने बताया कि किस प्रकार उसने उस मनुष्य की परीक्षा लेकर जान लिया कि उसे नंगे पैर चलने की भी आदत नहीं, वह
 दरिद्र नहीं बल्कि किसी अच्छे कुल का खाता कमाता पुरूष है।”
बादशाह बोले, “क्यों न हो, वह मेरा खास सैनिक है।” फिर बहुत प्रसन्न होकर बोले, “सचमुच बीरबल! माबदौलत तुमसे बहुत खुश हुए! तुम्हें
 धोखा देना आसान काम नहीं है।”
बादशाह के साथ साजिश में शामिल हुए सभी दरबारियों के चेहरे बुझ गए

                                                      *************


हूर  परी  और चुड़ैल:-

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा – हूर ,परी और चुड़ैल लाओ . दूसरे दिन बीरबल ने एक वेश्या और अपनी स्त्री को लेकर जब दरबार में 
 
पहुंचे तो कहा – हुजूर ! अपनी बेगम साहिबा को और बुलवा लीजिये . बादशाह की आज्ञा से बेगम साहिबा भी आ गयी ,तब बीरबल ने इस प्रकार जबाब
 
 दिया . उसने कहा – हुजूर ! यही वेश्या हूर है यानी जन्नत में मिलने वाली सुंदरी ,दूसरी मेरी स्त्री है जो यह सर्व सुंदरी है और सब स्त्री सुलभ गुणों से
 
 पूर्ण है , न कभी गहनों के लिए झगडती है और न किसी बात के लिए मचलती है इसीलिए यह परी है . तीसरी बेगम साहिबा है . आप खुद ही जानते है
 
 ,इनकी इच्छा पूरी करना आपका दिन का खाना और रात की नींद को हराम कर देता है . बेगम साहिबा मन मसोस कर रह गयी . बादशाह बड़े शर्मिंदा
 
 हुए .

                                                      *************

                                                                                           

दुर्गा  माँ  के  दर्शन:-

एक बार स्वप्न में बीरबल ने देखा कि हज़ार मुँह वाली दुर्गा देवी की मूर्ति महाविक्राल वेश धारण किये सामने खड़ी है . उसका वेश बड़ा ही भयोत्पादक 

था . उसे देखकर पहले तो बीरबल बड़े प्रसन्न हुए फिर वे उदास हो गए. दुर्गा माता यह देखकर बड़े आश्चर्य में पड़ गयी और बोली – बीरबल ! पहले तू 


मुझे देख कर प्रसन्न हुआ और फिर उदास हो गया ,ऐसा क्यों ? क्या तू मुझे देखकर डरता नहीं ?

बीरबल ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया – मातेश्वरी ! आप तो जगत माता है . आपसे मुझे क्या डर ? मुझे तो इस बात का दुःख है कि आपके नासिका तो

 हज़ार है परन्तु हाथ दो ही है . जब हमें जाड़े में जुकाम होता है तो हम तो दो हाथों से नासिका साफ़ करते-करते परेशान हो जाते है , तब आप तो जाने


 किस तरह साफ़ करती होंगी .

 बीरबल की बुद्धिमत्ता पूर्ण बात सुन कर दुर्गा देवी बड़ी प्रसन्न हुई और उसे संसार का सबसे बड़ा विद्वान होने का वर देकर अंतर्ध्यान हो गयीं .

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सबके मन की बात:-

एक बार दरबार में एक सभासद ने बादशाह अकबर से कहा – जहाँपनाह ! ऐसा कौन सा प्रश्न है ,जो हम नहीं बता सकते और बीरबल बता सकता है ?

बादशाह ने मन में सोचा कि इसको बीरबल से नीचा दिखाऊंगा . यह सोचकर उन्होंने कहा – अच्छा बताओ इस समय लोगों के मन में क्या है ?
वह सभासद बोला – हुजूर ! यह बात तो सिवाय खुदा के और कोई नहीं बता सकता ,बीरबल बता दें तो हम जाने .
उसी समय बीरबल बुलाये गए . उनके सामने भी यही प्रश्न रखा गया . उन्होंने तुरंत ही कहा इस समय सबके मन में यही बात है कि यह दरबार सदा 
 
इसी तरह भरा रहे और बादशाह सलामत सदा जिंदा रहें .
 
 

सभी ने उनकी बात को मान लिया , क्योंकि अस्वीकार करने पर मौत किसे बुलानी थी . बेचारा सभासद अपना सा मुँह लेकर रह गया . बादशाह 


अकबर जबाब को सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और बीरबल को पुरस्कार भी दिया .               

                                                      *************

 

गंगा जल अमृत है:-

एक बार चीन के बादशाह बीमार पड़े. उन्हें किसी ने बतलाया कि भारतबर्ष से गंगा नदी का जल मंगवाए , वह फायदा करेगा . बस उन्होंने एक दूत गंगाजल लाने को भेजा . उसने बादशाह अकबर के दरबार में पहुँच कर सारा हाल कहा और गंगा जल माँगा . उस समय बीरबल भी वही मौजूद थे . उन्होंने क्रोधित होकर कहा – हमारे यहाँ कोई गंगा जल नहीं है . सारे दरबारी और बादशाह अकबर बड़े आश्चर्य में पड़ गए कि बीरबल क्या कह रहा है ? उन्होंने उससे पूछा – बीरबल पागल तो नहीं हो गए हो ? भारतबर्ष में गंगा नदी है तो सही . बीरबल ने कहा – हुजूर ! वह गंगा जल नहीं वह तो अमृत है . चीन के दूत ने कहा कि अमृत ही दे दो , लेकिन उत्तर मिला कि अपने बादशाह से पूछ कर आओ , तब मिलेगा .
आखिर वह दूत लौटकर चीन चला गया और वहाँ से बादशाह की आज्ञा लेकर आया , तब उसे (अमृत) गंगाजल दिया गया .
 

                                                      *************

ईश्वर जो भी  अच्छा ही करता है:-

बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि ‘ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।’

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, ‘‘देखो, ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया-कल-शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ?’’
कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल, ‘‘मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है।’’

सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।
तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, ‘‘बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए।’’
बीरबल मुस्कराता हुआ बोला, ’’ठीक है जहांपनाह, समय ही बताएगा अब।’’

तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए, बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।
‘‘नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती।’’ मंदिर का पुजारी बोला, ‘‘यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे, अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा।’’
और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।

अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।
तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।
‘‘तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ?’’ अकबर ने सवाल किया।
जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, ‘‘अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है, मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी।’’
अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा, जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

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KOI PATTHA CHAD GAYA HOGA:-

EK DIN BEGUM KE SHARIR ME PEEDA HO GAYI BADSHAH NE BEERBAL SE KARAN PUCHA
BEERBAL NE MUH BANAKAR UTTAR DIYA-“KI HAJUR KOI PATHA CHAD GAYA HOGA”BADSHAH PAANI PAANI HO GAYE

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BEFIKRA KOAN:-

EK DIN BADSHAH NE DARBAAR ME PUCHA-” KI SANSAR ME KOI AISA BHI ADMI HA JISE
KISI TARAH KI JINTA NAHI HOTI , IS QUS. PAR DARBARI CHUP HO GAYE
TAB BEERBAL SE UTTAR DENE KE LIYE KAHA, USNE KAHA HUJUR ” 5 SAAL KA LADKA UTTAR SE

DARBARI , BADSHAH SABHI CHUP HO GAYE

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NAKLI BEERBAL:-

 
BADSHAH KO JAB BEERBAL KE MARNE KA SAMACHAR MILATHA TAB SE USKE VIRAH KE KARAN BADA DILGEER RAHTA THA. BADSHAH KI UDASI
MITANE KE LIYE LOGO NE BADI BADI TARKEEBE SOCHI PAR DIL KI LAGAN BURI HOTI H.
JAB UPAYO SE KUCH SIDH NA HUA, TO DARBARIYO NE ASTH KOSHAL KI EK NAYI YUKTI SOCH NIKALI KISHI NE DARBARIYO SE KANO KAAN KAHALVAYA KI BEERBAL ABHI
JEEVIT H.
JAB IS HAVA SE BHI BADSHAH KO SANTOSH NAHI HUA,TAB DOOR DOOR KE SHAHRO TATHA DEHATO SE BHI BEERBAL KE JEEVIT HONE KA SAMACHAR AANE LAGA
LOG KAHTE H KI VAHA LADAI SE BACHKAR EK DUSRE SHAHR ME CHUPKAR BAITHA HA.
EK BAAR AISI GHATNA GHATI KI KISI MANUSYA NE APNE KO BEERBAL KAHKAR GHOSIT KIYA
LEKIN USKA BADSHAH SE SAKSHAT NA HO SAKA VAHA AATE AATE BICH MARG ME SWARAGVASI HO GAYE .BADSHAH KA MATVYA  PURA NAHI HUA JEEVAN PRAYANT VE APNE PRIYA BEERBAL SE NA
MIL SAKE EK VILLAGE ME SAND THA USNE IS GHATNA KE DO SAAL BAAD EK KULDRAV ME APNE KO BEERBAL KAHKAR GHOSIT KIYA AUR LOGO ME IS TARAH KA PRACHAR KIYA KI MAIN BEERBAL HU
  TAB PATHANO KA YUDH CHIDA THA TAB MAIN LADAI ME AHAT HOKAR EK MAHATMA KI KRAPA SE JEETA JAGTA BACH NIKLA MAHATMA NE MERA UPCHAR KIYA
AB MAIN EKDUM CHANGA HO GAYA TO SADHU KI AGYA LEKAR IS VILLAGE MAIN AA BASA . US MANUSYA KI SURAT BHI BEERBAL SE MILTI JULTI THI

USNE BEERBAL KE JEEVAN KAAL KISAARI BAATE BHALIBHATI SMARAN KAR LI THI JISSE BEERBAL SAMBANDHI HONE PAR UTTAR DE SAKE…………………………..

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KOAN SI RITU SARVOTTAM:-

EK DIN BEERBAL AUR BADSHAH RAJKIYA KARYO SE AVKASH PAKAR APNE DARBAR ME
BAITHE THE ,IDHAR UDHAR KI BAATE BHI HO RAHI THI .
TAB BADSHAH NE PUCHA “GARMI,BARSAAT,JADA,HEMANT,SISAR AUR BASANT IN 6 RITUO ME
SARVOTTAM KON SI H…… DARBARIYO NE APNI APNI ABHIRUCHIYO KE ANUSAR KISI NE KUSH AUR KISI NE KUCH BATAYA
LEKIN CLEAR NI HUA TAB BADSHAH NE BEERBAL SE PUCHAUSNE TURANT JAWAB DIYA-“PRATHVINATH PET BHAR KI RITU ACCHI H
BHUKE KE LIYE SABHI RITU KHARAB H
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