Motivational story of IAS toppers in hindi(आईएएस अफसर)

रिक्शा  वाले का बेटा  बना आईएएस अफसर :-

ये  कहानी  है  गोविन्द    जैस्वाल   की , गोविन्द   के  पिता  एक  रिक्शा -चालक  थे , बनारस  की  तंग  गलियों  में  , एक छोटे से के  किराए  के  कमरे  में  रहने  वाला  गोविन्द  का  परिवार  बड़ी  मुश्किल  से  अपना  गुजरा  कर  पाता  था . ऊपर से  ये  कमरा  ऐसी  जगह  था  जहाँ  शोर -गुल  की कोई  कमी  नहीं  थी , अगल-बगल  मौजूद  फक्ट्रियों  और  जनरेटरों  के  शोर  में  एक  दूसरे  से  बात  करना  भी  मुश्किल  था .

 
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नहाने -धोने  से  लेकर  खाने -पीने  तक  का  सारा  काम इसी  छोटी  सी जगह  में  गोविन्द , उनके  माता -पिता  और  दो  बहने  करती  थीं . पर  ऐसी  परिस्थिति  में  भी  गोविन्द  ने  शुरू  से  पढाई  पर  पूरा  ध्यान  दिया .
अपनी  पढाई  और  किताबों  का  खर्चा  निकालने  के  लिए  वो   क्लास आठ से  ही  टूशन पढ़ाने  लगे . बचपन  से  एक  असैक्षिक  माहौल  में  रहने  वाले  गोविन्द  को  पढाई  लिखाई   करने  पर  लोगों  के  ताने  सुनने पड़ते  थे . “ चाहे  तुम  जितना  पढ़ लो  चलाना  तो  रिक्शा  ही  है ” पर  गोविन्द  इन  सब  के  बावजूद  पढाई  में  जुटे  रहते . उनका  कहना  है . “ मुझे  divert करना  असंभव था .अगर  कोई  मुझे  मोटीवेट  करता  तो  मैं  अपनी  फैमिली  के  बारे  में  सोचने  लगता .”
आस – पास  के  शोर  से  बचने  के  लिए  वो  अपने  कानो  में  रुई लगा  लेते  , और  ऐसे  वक़्त  जब  प्रोब्लेम्स ज्यादा  होती  तब  मैथ लगाते  , और  जब  कुछ  शांती  होती  तो  अन्य  सब्जेक्ट्स पढ़ते .रात में  पढाई के लिए अक्सर उन्हें मोमबत्ती, ढेबरी , इत्यादि का सहारा लेना पड़ता क्योंकि उनके इलाके में कई  घंटे बिजली कटौती रहती.
चूँकि   वो  शुरू  से  स्कूल टोपर रहे  थे  और  साइंस  में  काफी  तेज  थे  इसलिए   क्लास 12 के  बाद  कई  लोगों  ने  उन्हें  इंजीनियरिंग करने  की  सलाह  दी ,. उनके  मन  में  भी  एक  बार  यह विचार  आया , लेकिन  जब  पता  चला  की  एप्लीकेशन फॉर्म की  फीस ही  500 रुपये  है  तो  उन्होंने  ये  विचार बदल   दिया , और  BHU से  अपनी  ग्रेजुएशन करने  लगे , जहाँ  सिर्फ  10 रूपये की औपचारिक fees थी .
गोविन्द अपने  IAS अफसर बनने  के  सपने  को  साकार  करने  के  लिए  पढ़ाई  कर  रहे  थे  और  फाइनल  प्रिपरेशन के  लिए  Delhi चले  गए  लेकिन  उसी  दौरान   उनके  पिता  के  पैरों  में  एक  गहरा  घाव  हो  गया  और  वो  बेरोजगार  हो  गए . ऐसे  में  परिवार  ने  अपनी  एक  मात्र  सम्पत्ती  , एक  छोटी  सी  जमीन  को  30,000 रुपये  में  बेच  दिया  ताकि  गोविन्द अपनी  कोचिंग पूरी  कर  सके . और  गोविन्द ने  भी  उन्हें  निराश  नहीं  किया , 24 साल  की  उम्र  में  अपने  पहले  ही एटेम्पट में  2006, 474 सफल  कैंडिडेट्स में  48 वाँ  स्थान  लाकर  उन्होंने  अपनी  और  अपने  परिवार  की  ज़िन्दगी  हमेशा -हमेशा  के  लिए  बदल  दी .
मैथ पर  कमाण्ड होने  के  बावजूद  उन्होंने  MAINS के  लिए  PHILOSHPYऔर  HISTORY CHOOSE किया , और  प्रारंभ  से  इनका  अध्यन  किया ,उनका कहना  है  कि , “ इस  दुनिया  में  कोई  भी  एग्जाम  कठिन  नहीं  है , उसे  crack करने  की  लगन  होनी  चाहिए .”
अंग्रेजी  का  अधिक  ज्ञान  ना  होने पर  उनका  कहना  था , “ भाषा  कोई  परेशानी  नहीं  है , बस  आत्मव्श्वास  की ज़रुरत  है . मेरी  हिंदी  में  पढने  और  व्यक्त  करने  की  क्षमता  ने  मुझे  इस लायक बनाया .अगर  आप  अपने  विचार  व्यक्त  करने  में  कॉंफिडेंट हैं  तो  कोई  भी  आपको  सफल  होने  से  नहीं  रोक  सकता ..भाषा  सीखना  कोई  बड़ी  बात  नहीं  है – खुद  पर  भरोसा  रखो . पहले  मैं  सिर्फ  हिंदी  जानता  था ,IAS academy में  मैंने  इंग्लिश पर  अपनी  पकड़  मजबूत  की .
 गोविन्द  जी  की  यह  सफलता  दर्शाती  है  की  कितने  ही  आभाव  क्यों  ना  हो  यदि  दृढ  संकल्प  और  कड़ी मेहनत   से  कोई  अपने  लक्ष्य -प्राप्ति  में  जुट  जाए  तो  उसे  सफलता  ज़रूर  मिलती  है

2.वेटर बना  ,IAS OFFICER :-

मैं पैदा हुआ था और वेल्लोर जिले में Vinavamangalam नामक एक छोटे से गांव में लाया गया था। मेरे पिता का नाम Krishnan था, जो 10th standard तक study की थी , एक चमड़े के कारखाने में एक supervisor के रूप में काम किया। मेरी माँ एक गृहिणी थी। मैं परिवार में सबसे बड़ा  हूँ और दो बहनें और एक भाई है। मैं गांव के स्कूल में 8 वीं कक्षा तक अध्ययन किया और पास के एक शहर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

मैं पढ़ाई में काफी अच्छा था और हमेशा प्रथम स्थान पर रहा। मेरी केवल एक ही ambition थी to get job first,जिससे मैं अपनी फैमिली की हेल्प कर सकु। मेरे पापा 4500 सैलरी थी ,  वो फैमिली और  4  बच्चो का खर्च चलने  बहुत मुस्किल था।
इसलिए 10th class के बाद मैंने polytechnic कॉलेज join कर लिया क्यों कि मैंने सुना था जब मैं यहाँ से पास हूँगा तो मेरे को अच्छी जॉब मिल जाएगी , जब मैं 91 % से पास हुआ तो मेरे पास ‘government engineering college’ की मेरिट लिस्ट में एंट्री करने  का चांस था ,इसलिए मैंने Thanthai Periyar Government Engineering College as mechanical engineering में admission लिया   आगे की पढाई के लिए मेरे पापा ने support किया।
 जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था ,महत्वाकांक्षा एक नौकरी पाने के लिए अभी भी था। अगर आप मेरी background देखे तो  मैं इस ambition के लायक  नहीं था। गांव में मेरे दोस्तों में से अधिकांश केवल 10 वीं कक्षा तक अध्ययन किया था, और बहुत से ने स्कूल भी कम्पलीट नहीं । वे ऑटो चालकों या कुली या राजमिस्त्री के रूप में काम किया  करते है । मैं अपने दोस्तों में केवल एक ही था जो कॉलेज गया।
मैंने  अपने माता-पिता की शिक्षा के महत्व को समझा। जिन्होंने स्कूल कम्पलीट किया वो मेरी फैमिली में मेरे पापा हीहैं, इसलिए वो education की value जानते  थे । मेरे माता पिता ने हम  बच्चो को अच्छी तरह  पढ़ाया था।

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About your job:-

मैंने २००० में अपनी engineering कम्पलीट की , फिर मैं banglore चला गया नौकरी की तलाश में.……… बहुत कठिनाई के बिना एक एक नौकरी मिल गयी । मेरा काम औजार मरम्मत करना था जिसके लिए सैलरी २५०० rupees थी
यह मैं अपने गांव और मेरे दोस्तों के बारे में सोचना शुरू कर दिया जब मैं  बंगलौर में था। उनमें से किसी ने भी study नहीं की थी आज वे अच्छी कंपनी में है, क्योंकि वे हमेशा गरीब बने रहे। यहां तक ​​कि उचित भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था। वहाँ कोई मौका नहीं था, वो जहा काम करते थे वो केवल एक ही जगह थी वो वे चमड़े का कारख़ाना ,अगर वहाँ काम नहीं मिलता , तो वे ऑटो चालकों या कुली के रूप में काम किया करते । संक्षेप में, युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करने के मेरे गांव में कोई नहीं था।
मुझे लगता है मैं किसी भी तरह से मेरे ग्रामीणों की मदद करने में सक्षम होगा?

about your intrest in administrive service:-

तब तक, मैंने   CIVIL SERVICE EXAM  में कुछ भी  नहीं सुना था। मैं बंगलौर के पास गया और मैं कई चीजों के संपर्क में था कि दुनिया को देखा । मैंने सोचा  छोटी सी जगह में एक कलेक्टर बहुत कुछ कर सकता है। उस पल में, मैंने सोचा मुझे  IAS OFFICER बनना चाहिए।
मैं इस्तीफा दे दिया है और परीक्षा के लिए तैयार करने के लिए अपने घर चला गया। मुझे  विश्वास था और मैं अच्छी तरह से करना होगा ,मुझे ये नहीं पता था की resign देना मेरे लिए Risky हो सकता है
मेरे पिता ने भी तहे दिल से मुझे समर्थन किया। उन्हें  रुपये 6500 का बोनस मिला था  और उन्होंने वो मुझे दे दिए  अध्ययन सामग्री खरीदने के लिए है कि पैसे दिए। मैं अपने गांव में बैठा था , मैं चेन्नई से डाक द्वारा प्राप्त नोटों से अध्ययन किया।

 how many time you failure:-

मेरे पहले दो प्रयास में, मैं prelims और main क्लियर नहीं कर पाया । मुझे नहीं पता था की मुझे कैसे तैयारी करनी है । मुझे मार्गदर्शन करने के लिए कोई नहीं था।
मैं अपने main subject के रूप में मैकेनिकल इंजीनियरिंग ले लिया था। मैंने  वेल्लोर में उमा सूर्य से मुलाकात की थी  । वो भी इन्ही exam की तैयारी कर रही थी । उन्होंने कहा कि मैं एक विकल्प के रूप में समाजशास्त्र  ले लू , तो यह आसान होगा।
यहां तक ​​कि मुख्य विषय के रूप में समाजशास्त्र के साथ, मैं तीसरे प्रयास में विफल रहा है। लेकिन मैं निराश नहीं था। मैं असफल रहा था क्यों कि मैं जानता था। मैं उचित मार्गदर्शन नहीं था। मैं परीक्षा के लिए तैयारी शुरू कर के बाद ही मैं समाचार पत्र पढ़ने शुरू कर दिया।
 

about your job & working experience:-

मैं Sathyam सिनेमाघरों में कैंटीन में कंप्यूटर बिलिंग के लिए एक बिलिंग क्लर्क के रूप में एक नौकरी मिल गई। मैं भी अंतराल के दौरान सर्वर के रूप में काम किया। यह सिविल सेवाओं के लिए तैयारी कर रहा है, मुझे लगता है कि मैं एक मैकेनिकल इंजीनियर परेशान एक सर्वर के रूप में काम करने के लिए नहीं था। परीक्षा पास करने के लिए चेन्नई में पर रहने के लिए – मैं केवल एक ही उद्देश्य था।
 

 interview in delhi:-

मैं Sathyam सिनेमाघरों में नौकरी मिल जाने के बाद, मैं साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। परामर्श मेरा शौक था, बहुत सारे सवाल परामर्श के बारे में पूछा गया। मैं अंग्रेजी में बहुत धाराप्रवाह नहीं था, लेकिन मुझे लगता है कि मैं चाहता था जो कुछ संप्रेषित करने में कामयाब रहे। शायद मैं अच्छी तरह से स्पष्ट नहीं किया। मैं साक्षात्कार में विफल रहा है।

fifth times failed in prelims:-

एक बार फिर, मैं शुरू से ही शुरू कर दिया। हैरानी की बात है, मुझे लगता है कि  prelims अपने आप में विफल रहा है।  जब मैंने सोचा मैं prelims में फ़ैल कैसे हुआ, मुझे लगा शायद  Sathyam सिनेमाघरों में काम करने की वजह से मुझे पूरा time नहीं मिला prepare करने का।
मैंने  नौकरी छोड़ दी और UPSC की परीक्षाओं के लिए तैयारी कर उन लोगों के लिए  SOCIOLOGY को पढ़ाने के लिए एक निजी फर्म में शामिल हो गए। मैंने  वहाँ अन्य विषयों पर भी focus  किया , जबकि चेन्नई में मेरा कई मित्रों ने मेरी  आर्थिक मदद की।

In Sixth Chance:-

इस बार मैं mains और prelims  दोनों में पास रहा ,लेकिन interview में निकाल दिया मेरे को
जबकि मैं interview के लिए तैयारी कर रहा था , मैंने intelligence bureo में अफसर बनने के लिए exam  दिया और पास भी हुआ । मैं दुविधा में  था । मुझे लगा अगर  मैं आईबी में शामिल हो गया , तो एक बार फिर से, मेरी  ias की तैयारी ठीक तरीके से नहीं हो पायेगी , इसलिए मैंने  INTELLIGENCE BUREAU छोड़ दी।
और एक बार फिर जुट गया तैयारी करने IAS की
 

LAST ATTEMPT:-

पिछले INTERVIEW के कुछ दिन बाद फिर से मेरे को preliminary  देना था,जोकि मेरा लास्ट ATTEMPT था । मैं उलझन में था  और डर गया था। अंत में, मैंने  लास्ट चांस के लिए एग्जाम दिया  का फैसला किया। मुझे उम्मीद थी की मैं PRELIMS और MAIN दोनों में PASS हो  जाऊंगा।
 
INTERVIEW  दिल्ली में अप्रैल, 2008 में था। मेरे से INTERVIEW में Tamil Nadu, Kamaraj, Periyar, Tamil as a classical language, the link between politics and Tamil cinema etc. के बारे में  पूछा गया था ,मैं UPSET था ,मुझे interviewver से start में ऐसी आशा नहीं थी ,interview के last में जब मैंने thanx बोला interviewer ने कोई reply नहीं दिया ,इस incident के बाद मेरा mind खेलने चला गया और मैंने भगवान से pray किया और  वापस चला गया।
 

रिजल्ट वाले दिन :-

 
मैं उस दिन बेहद तनाव में था। मैंने relised किया पता नहीं मेरा सपना पूरा होगा या नहीं । मैंने भगवन से pray किया अगर  ईश्वर मेरे को आप इस काबिल समझते हो तो please पास कर दो।
 
मैं एक खेल के  मैदान के पास गया और थोड़ी देर के लिए ध्यान लगाकर  वहाँ बैठा  रहा । तो फिर, मैंने सोचना start कर दिया अगर मैं पास हुआ तो क्या करूँगा अगर नहीं हुआ तो क्या करूँगा
 
मेरा पिछले 7  साल से केवल एक ही सपना था ,IAS OFFICER  बनने का।
 
 
अंत में result  आया मुझे अपने आप पर विशवास नहीं हुआ ,मेरी 156 rank थी out of more than 700 selected candidates
 
मैंने महसूस किया मानो मैं कोई युद्ध जीत गया हूँ जो कई वर्ष से चल रहा था। मुझे  स्वतंत्र और राहत महसूस हुआ।
 
पहली बार से अच्छी news मैंने अपने दोस्तों  को दी उसके बाद मैंने अपनी फैमिली को

solid welcome in village:-

 
मैं जब अपने  village पंहुचा तो मेरा स्वागत अश्चार्यजनिक था । मैं जब बस से उतरा तो मैंने देखा मेरे दोस्त ,मेरी फैमिली और मेरा पूरा village मेरा इंतजार कर रहे थे। उन्होंने पठाके छुटाएं , म्यूजिक बजाया ,और मुझे अपने कंधे पर उठाया और पुरे village में घुमाया । पूरे गांव मुझे बधाई करने के लिए मेरे घर आया था। यही अवसर था जब मैंने अपने ग्रामीणों के बीच एकता देखी। यह मेरे लिए एक निर्णायक क्षण था।
 

whats next :-

 
मैं अपने सपने को साकार करने के लिए अपने आप में विश्वास खोने के बिना वास्तव में बहुत मेहनत की है। मेरा असली काम अब शुरू होता है। मैं गरीबी उन्मूलन और सभी लोगों के लिए शिक्षा का संदेश प्रसारित करने के लिए कड़ी मेहनत की कोशिश करना चाहते हैं। शिक्षा गरीबी उन्मूलन के लिए सबसे अच्छा साधन है। मैं तमिलनाडु को भी केरल की तरह literate state देखना चाहता था।
 
 
यंग जनरेशन को मेरा example लेना चाहिए । मेरी background बहुत ख़राब है ,मैं एक गरीब परिवार से blong करता हु ,बस जो भी हु आज एजुकेशन के दम पर हु। जब मैं छोटा था मैं किसी को भी follow  नहीं करता था । इसलिए ।इसलिए मैं village की youth generation को proper guidness देना चाहूंगा , उन सभी में ऊपर जाने की क्षमता है, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन करने के लिए कोई नहीं है। मैं इस तरह के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक होना चाहता  हू । , मुझे लगता है ,मैं उन्हें सबसे अच्छा समझता  हू ।
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