THE GREAT GAMA IN HINDI-ग्रेट गामा

‘SHER-E-PUNJAB’,  ‘THE GREAT GAMA’ जैसी जैसी उपाधियाँ दी गयीं। गामा का जन्म एक कुश्ती-प्रेमी ‘MUSLIM’ परिवार में 1880 में हुआ। अमृतसर पंजाब में पैदा हुए गामा कश्मीरी ‘बट’ परिवार के ‘पहलवान मुहम्मद अज़ीज़’ के पुत्र थे। उनका जन्म का नाम ‘GULAM MOHAMMAD’ था। उनकी रग-रग में कुश्ती का खेल समाया हुआ था। गामा और उनके भाई ‘IMAMBAKSH’ ने शुरू-शुरू में कुश्ती के दांव-पेच पंजाब के मशहूर ‘पहलवान माधोसिंह’ से सीखने शुरू किए। दतिया के महाराजा भवानी सिंह ने गामा और उनके छोटे भाई ‘IMAMBAKSH’ को पहलवानी करने की सुविधायें प्रदान की। दस वर्ष की उम्र में ही गामा ने JODHPUR(RAJASTHAN) में कई पहलवानों के बीच शारीरिक कसरत के प्रदर्शन में भाग लिया और ‘MAHARAJA JODHPUR’ ने गामा को उनकी अद्भुत शारीरिक क्षमताओं को देखते हुए पुरस्कृत किया।

BHATI,

1947 में “INDIA”के बँटवारे के समय GAMA ‘PAKISTAN’ चले गये वहाँ अपने भाई इमामबख़्श के  साथ  और  अपने  भतीजों  के साथ अपना शेष जीवन बिताया  ‘रुस्तम-ए-ज़मां’ के आखिरी दिन बड़े कष्ट और मुसीबत में गुज़रे। ‘RAVI RIVER’ के किनारे इस अजेय पुरुष को एक छोटी-सी झोंपड़ी बनाकर रहना पड़ा। अपनी अमूल्य यादगारों सोने और चाँदी के तमग़े बेच-बेचकर अपनी ज़िन्दगी के आखिरी दिन गुज़ारने पड़े। वह हमेशा बीमार रहने लगे। उनकी बीमारी की ख़बर पाकर भारतवासियों का दु:खी होना स्वाभाविक ही था।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की शादी गामा पहलवान के भाई की नातिनी कुलसुम बट से हुई है।

दिन में पांच हजार उठक-बैठक और तीन हजार दंड बैठक (PUSH UPS), खाने में रोजाना 10 लिटर दूघ, आधा लिटर घी, भारी मात्रा में बादाम और जूस तथा प्रतिदिन छह मुर्गियों को खाने वाला कोई इंसान एक सामान्य इंसान नहीं हो सकता, लेकिन विश्व में ‘रुस्तम-ए-जमां’ नाम से मशहूर गामा पहलवान की यह दैनिक डाइट थी.

कश्मीरी ‘बट’ परिवार से नाता रखने वाले गामा पहलवान के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह विश्व में एकमात्र ऐसे पहलवान हैं जिन्होंने अपने जीवन में कोई कुश्ती नहीं हारी. 5 फुट 7 इंच के गामा ने विश्व में अपने से लंबे पहलवानों को कई बार पटकनी दी है.

अपनी अद्वितीय शक्ति और फुर्ती से रहीमबख्श सुल्तानीवाला को हराने के बाद गामा का नाम विश्व में तेजी से फैल गया.

उन्होंने विश्व दंगल में अमेरिका के पहलवान ‘BANJAMIN ROLAR’, विश्व विजेता पोलैण्ड के स्टेनली जिबिस्को को हराया.

विश्व विजेता स्टेनली जिबिस्को के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह गामा से ज्यादा वजनी होने के बावजूद उनसे डरता था. एक बार कुश्ती के दौरान ‘POLAND’ का यह पहलवान बीच में ही मैदान छोड़कर भाग गया..

19 साल के GAMA ने तत्कालीन भारत विजेता ‘पहलवान रहीमबख़्श सुल्तानीवाला’ को चुनौती दे डाली। रहीमबख़्श गुजराँवाला पंजाब का रहने वाला कश्मीरी, ‘बट’ जाति का ही था।

कहते है रहीमबख़्श की लम्बाई 7 फीट थी। गामा में शक्ति और फुर्ती अद्वितीय थी लेकिन गामा की लम्बाई 5 फुट 7 इंच थी। रहीमबख़्श अपनी प्रौढ़ा अवस्था में पहुँच चुका था और अपनी पहलवानी के अंतिम समय की कुश्तियाँ लड़ रहा था।रहीमबख़्श की उम्र का अधिक होना गामा के पक्ष में जाता था।

भारत में हुई कुश्तियों में यह कुश्ती ‘ऐतिहासिक कुश्ती’ के रूप में जानी जाती है, जो घंटों तक चली और अंत में बराबर छूटी। अगली बार जब गामा और रहीमबख़्श की कुश्ती हुई तो गामा ने रहीमबख़्श को हरा दिया था,लेकिन गामा की नाक से ख़ून बहने लगा था और एक कान भी जख़्मी हो गया था।

रहीमबख़्श  को गामा ने अपने पहलवानी और कुश्ती के दौर का सबसे बड़ा, चुनौतीपूर्ण और शक्तिशाली प्रतिद्वंदी माना। इंगलैंड से लौटने के बाद गामा और रहीमबख़्श की कुश्ती इलाहाबाद में हुई। यह कुश्ती भी काफ़ी देर चली और गामा ने इस कुश्ती को जीतकर “रुस्तम-ए-हिंद” का ख़िताब जीता।

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